हिंदी कवयित्री Greater Noida · since ’16

🍂 वैराग्यं परमं सुखं 🥀

पर बात जब तुम्हारी हो तो कलम कुछ लिख ही देती है

स्याही और मौसम

/ काव्य-संग्रह

कविताएँ

सात रचनाएँ — प्रेम से विरह तक, और उस प्रश्न तक जो हर कवि खुद से पूछता है: कौन हूँ मैं? किसी भी पत्ती को छूकर पूरा संग्रह किताब की तरह पलटें।

  1. ०४Devotion

    मैं अब तक जान ना पाया हूँ

    मैं अब तक जान ना पाया हूँ, क्यों तुझसे मिलने आया हूँ। तुम मेरे दिल की धड़कन में,

    नियतिपढ़ें →
  2. ०५Reunion

    एक उठते बवंडर की तरह

    एक उठते बवंडर की तरह मन में हलचल लिए, व्याकुल हृदय पग आगे बढ़ा रहे पर, नयन की हृदयगति थमी है,

    मिलनपढ़ें →
  3. ०६Vairagya

    विराह वेदना मिटाने को

    विराह वेदना मिटाने को यहाँ बचपन जैसा कोई नहीं, ममत्व की छवि मिले

    वैराग्यपढ़ें →
  4. ०७Memory

    रुकना थोड़ा सा

    रुकना थोड़ा सा, जी भर कर देख लूँ तुम्हें तुम्हें बुरा न लगे तो थोड़ी आँखें सेक लूँ मैं, बात यह तो काफ़ी पुरानी हो गई है

    स्मृतिपढ़ें →

/ प्रकाशित · in print

बाहर छपी हुई

कुछ रचनाएँ पत्रिकाओं में भी छपी हैं। यह रही जिस्म — साहित्यिक पत्रिका अनहद कृति (अंक २७) में प्रकाशित, सीधे वहीं से।

साहित्यिक पत्रिका · दिसंबर २०१९

जिस्म

“सौन्दर्य था, यौवन का खिलता रूप था…”

अनहद कृति पर पूरी रचना पढ़ें

कीर्तिका गुप्ता — कवयित्री

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/ परिचय

दिल के कहे को
कागज़ पर उतारती हूँ

मैं कीर्तिका — ग्रेटर नोएडा की एक कवयित्री। न कोई मंच, न कोई शोर; बस जब मन भर आता है, तो कलम खुद-ब-खुद कुछ लिख देती है।

मेरी कविताएँ हिंदी की शास्त्रीय भाषा और आज के मन के बीच कहीं रहती हैं — कहीं विरह है, कहीं वैराग्य, कहीं वो प्रतीक्षा जो बरसों से आँखों में सजी है। सब कुछ दिल की सुनकर लिखा गया।

पन्ने पलटकर देखें

/ आने वाला · pre-order

कविताएँ अब
तुम्हारे हाथों में

बिखरी हुई पंक्तियाँ अब एक जिल्द में। कीचड़ में कमल — कीर्तिका की चुनिंदा रचनाओं का पहला संग्रह, प्रिंट और ई-बुक दोनों में। अभी नाम दर्ज कराएँ, पहली प्रति आप तक सबसे पहले पहुँचेगी।

ई-बुक · PDF ₹१९९ तुरंत डाउनलोड, हस्ताक्षरित प्रस्तावना

* संग्रह तैयार होते ही मूल्य व तारीख़ की पुष्टि ईमेल पर भेजी जाएगी।

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कविता-पाठ, काव्य-संध्या, ब्रांड सहयोग या किसी अवसर के लिए विशेष रचना — अगर शब्दों की ज़रूरत हो, तो बात करते हैं।

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महीने में कुछ पंक्तियाँ — जब कलम कुछ कहे, सबसे पहले आप पढ़ें।