हिंदी कवयित्री Greater Noida · since ’16
🍂 वैराग्यं परमं सुखं 🥀
/ काव्य-संग्रह
सात रचनाएँ — प्रेम से विरह तक, और उस प्रश्न तक जो हर कवि खुद से पूछता है: कौन हूँ मैं? किसी भी पत्ती को छूकर पूरा संग्रह किताब की तरह पलटें।
/ प्रकाशित · in print
कुछ रचनाएँ पत्रिकाओं में भी छपी हैं। यह रही जिस्म — साहित्यिक पत्रिका अनहद कृति (अंक २७) में प्रकाशित, सीधे वहीं से।
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/ परिचय
मैं कीर्तिका — ग्रेटर नोएडा की एक कवयित्री। न कोई मंच, न कोई शोर; बस जब मन भर आता है, तो कलम खुद-ब-खुद कुछ लिख देती है।
मेरी कविताएँ हिंदी की शास्त्रीय भाषा और आज के मन के बीच कहीं रहती हैं — कहीं विरह है, कहीं वैराग्य, कहीं वो प्रतीक्षा जो बरसों से आँखों में सजी है। सब कुछ दिल की सुनकर लिखा गया।
पन्ने पलटकर देखें
/ आने वाला · pre-order
बिखरी हुई पंक्तियाँ अब एक जिल्द में। कीचड़ में कमल — कीर्तिका की चुनिंदा रचनाओं का पहला संग्रह, प्रिंट और ई-बुक दोनों में। अभी नाम दर्ज कराएँ, पहली प्रति आप तक सबसे पहले पहुँचेगी।
* संग्रह तैयार होते ही मूल्य व तारीख़ की पुष्टि ईमेल पर भेजी जाएगी।
/ सहयोग · work with me
कविता-पाठ, काव्य-संध्या, ब्रांड सहयोग या किसी अवसर के लिए विशेष रचना — अगर शब्दों की ज़रूरत हो, तो बात करते हैं।
काव्य-संध्या व मंच पर सजीव पाठ के लिए आमंत्रण।
लिखें →शब्दों में पिरोई गई कहानियाँ — साझा रचनात्मक परियोजनाएँ।
लिखें →किसी ख़ास के लिए, किसी ख़ास अवसर पर — आपकी अपनी कविता।
लिखें →महीने में कुछ पंक्तियाँ — जब कलम कुछ कहे, सबसे पहले आप पढ़ें।